भारत रत्‍न 2019 !! Bharat Ratna 2019 and Full Details About Bharat Ratna in Hindi

Bharat Ratna 2019 and Full Details About Bharat Ratna in Hindi

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दोस्तो आज की हमारी पोस्ट Bharat Ratna 2019 के बारे में है ! इसमें हम आपको Bharat Ratna 2019 के बारे में Details में बताऐंगे, व इसके अलाबा भारत रत्न के बारे महत्वपूर्ण परीक्षापयोगी तथ्य भी आपको उपलब्ध कराऐंगे ! तो आप सभी से निवेदन है कि इसे अच्छे से पढिये और याद कर लीजिये ! आप सभी को आने बाले Exams के लिये बहुत सारी शुभकामनाऐं !

Bharat Ratna 2019 Important Facts in Hindi

  • राष्‍ट्रपति भवन (नई दिल्‍ली) ने 25 जनवरी, 2019 को पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रसिद्ध संगीतगार भूपेन हजारिका और समाजसेवी नानाजी देशमुख को भारत के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान ‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित किए जाने की घोषणा की गई।
  • सरकार ने चार वर्ष बाद भारत रत्‍न सम्‍मान की घोषणा की है। इससे पहले वर्ष 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय (मरणोपरान्‍त) को भारत रत्‍न दिया गया था।
  • बीस वर्ष बाद यह पहला अवसर है जब दो से अधिक लोगों को भारत रत्‍न के लिए चुना गया है। इससे पहले वर्ष 1999 में जयप्रकाश नारायण, पं. रविशंकर, डॉ. अमर्त्‍य सेन और गोपीनाथ बारदोलोई को भारत रत्‍न दिया गया था।
  • प्रणव मुखर्जी भारत के तीसरे पूर्व राष्‍ट्रपति है जिन्‍हें भारत रत्‍न से सम्‍मानित किया गया है। इनसे पहले वीवी गिरी (1975) और डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद (1962) यह उपलब्धि प्राप्‍त कर चुके हैं।
  • इसके अलावा भारत रत्‍न से सम्‍मानित डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम (1997), जाकिर हुसैन (1962) और सर्वपल्‍ली राधाकृष्‍णन (1954) भी भारत के राष्‍ट्रपति रह चुके हैं, परन्‍तु इन्‍हें राष्‍ट्रपति बनने से पहले ही ‘भारत रत्‍न’ सम्‍मान मिल गया था।
  • नानाजी देशमुख, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भारत रत्‍न से सम्‍मानित होने वाले आरएसएस से जुड़े दूसरे नेता हैं।

नानाजी देशमुख ( Nanaji Deshmukh )

    • मरणोपरान्‍त भारत रत्‍न से सम्‍मानित किए गए समाजसेवी नानाजी देशमुख का पूरा नाम चंडिका दास अमृत राव देशमुख है।
    • 11 अक्‍टूबर, 1916 को महाराष्‍ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक गाँव में जन्‍में नानाजी देशमुख के पिता का नाम अमृतराव देशमुख तथा माता का नाम राजाबाई अमृतराव देशमुख था।
    • नानाजी देशमुख 12 वर्ष की आयु में संघ से जुड़े, फिर जनसंघ से राजनीति में आए। नानाजी देशमुख को शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और ग्रामीण लोगों के बीच स्‍वावलम्‍बन हेतु किए गए कार्यों के लिए जाना जाता है।
    • वे आपातकाल के विरूद्ध जयप्रकाश नारायण के आन्‍दोलन के भी प्रमुख शिल्‍पकार रहे। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उनका उल्‍लेखनीय योगदान रहा। नानाजी देशमुख ने वर्ष 1950 में गोरखपुर में भारत के पहले सरस्‍वती शिशु मंदिर की स्‍थापना भी की थी।
  • नानाजी देशमुख ने ‘दीनदयाल शोध संस्‍थान’, ‘ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय’ और ‘बाल जगत’ जैसे सामाजिक संगठनों की स्‍थापना भी की थी। विनोबा भावे के ‘भूदान आन्‍दोलन’ में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले नानाजी देशमुख को वर्ष 1999 में ‘पद्म विभूषण’ से भी सम्‍मानित किया गया था।

भूपेन हजारिका ( Bhupen Hazarika )

  • मरणोपरान्‍त भारत रत्‍न से सम्‍मानित भूपेन हजारिका असम के बहुमुखी प्रतिभाशाली व्‍यक्तित्‍व थे।
  • असमी भाषा के कवि, गीतकार, संगीतकार व फिल्‍म निर्माता भूपेत हजारिका का जन्‍म तिनसुकिया जिले के सदिया कस्‍बे में 8 सितम्‍बर, 1926 को हुआ था। वे ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने गीतों को खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्‍हें दक्षिण एशिया के श्रेष्‍ठतम सांस्‍कृतिक दूतों में से एक माना जाता है।
  • भूपेन हजारिका ने अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा हिन्‍दी, बंगाली सहित कई भारतीय भाषाओं में गायन कार्य किया। उन्‍होनें भारत की संगीत परम्‍परा को विश्‍व स्‍तर पर लोकप्रिय बनाया। भूपेन हजारिका को पद्मश्री (1977), पद्म भूषण (2001), पद्म विभूषण (2012, मरणोपरांत), संगीत नाटक अकादमी (1987), दादासाहेब फाल्‍के पुरस्‍कार (1992) और असम रत्‍न (2009) सम्‍मान भी प्राप्‍त थे।
  • उनके द्वारा निर्देशित फिल्‍म शकुन्‍तला को वर्ष 1961 में सर्वश्रेष्‍ठ असमी फिल्‍म का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार भी मिला था।
  • असम में लोहित नदी (ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी) पर बनाये गये देश के सबसे लम्‍बे ढ़ोला-सदिया पुल का नामकरण हाल ही में भूपेन हजारिका के नाम पर किया गया है।

प्रणब मुखर्जी ( Pranab Mukherjee )

    • भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता प्रणब मुखर्जी का जन्‍म 11 दिसम्‍बर, 1935 को बंगाल प्रेसीडेन्‍सी (ब्रिटिश भारत) के बीरभूम जिले के मिराती गाँव में हुआ। पाँच दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहे प्रणब मुखर्जी वर्ष 2012-17 तक भारत के 13वें राष्‍ट्रपति रहे।
    • राष्‍ट्रपति के अलावा प्रणब मुखर्जी केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री (2009-12 व 1982-84), विदेश मंत्री (2006-09 व 1995-16) और रक्षा मंत्री (2004-06) भी रह चुके हैं।
    • इसके अलावा प्रणब मुखर्जी को वर्ष 1991 में तत्‍कालीन योजना आयोग का प्रमुख भी बनाया गया था।
    • 2012 में राष्‍ट्रपति का चुनाव लड़ने से पूर्व वह केन्‍द्र में वित्‍त मंत्री थे।
    • पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ‘द ड्रामेटिक डिकेड, द टर्बुलेण्‍ट ईयर्स और द कोलीजन ईयर्स’ नामक पुस्‍तक भी लिख चुके हैं।
    • इनकी आत्‍मकथा श्रृंखला की ‘द कोलीजन ईयर्स’ नामक पुस्‍तक में राजनीतिक नजरिया प्रदान करने के साथ-साथ कुछ दुर्लभ रहस्‍यों को भी बताया गया है। प्रणब मुखर्जी को वर्ष 2008 में ‘पद्म विभूषण’ से भी सम्‍मानित किया जा चुका है

 

  •  जून 2018 में नागपुर में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम को संबोधित कर आरएसएस के किसी कार्यक्रम में शामिल होने वाले पहले पूर्व राष्‍ट्रपति बने थे।

भारत रत्न के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी ( Important GK About Bharat Ratna )

  • भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान असाधारण राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है।
  • यह पुरस्कार 2 जनवरी 1954 को प्रारम्भ किया गया था। यह पुरस्कार भारत के प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद द्वारा घोषित किया गया था। अन्य अलंकरणों के भाँति इस सम्मान को भी, नाम के साथ पदवी के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। शुरू में इस सम्मान को ‘मरणोपरांत’ नहीं दिया जाता था, किंतु 1955 के बाद यह निर्णय लिया गया और यह मरणोपरांत भी दिया जाने लगा। तत्पश्चात् 13 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। सुभाष चन्द्र बोस को घोषित सम्मान वापस लिए जाने के उपरान्त मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 12 मानी जा सकती है।
  • भारत रत्न 26 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है।
  • सबसे पहला पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को दिया गया था। तब से अनेक विशिष्टजनों को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृाष्ट्ता और अतुलनीय योगदान देने के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
  • इसका कोई लिखित प्रावधान नहीं है कि ‘भारत रत्न’ केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाएगा।
  • यह पुरस्कार स्वाभाविक रूप से भारतीय नागरिक बन चुकी ‘एग्नेास गोंखा बोजाखियू’, जिन्हें हम मदर टेरेसा के नाम से जानते हैं, को दिया गया।
  • दो अन्य् अभारतीय “ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान” को 1987 में और “नेल्सन मंडेला” को 1990 में यह पुरस्कार दिया गया।
  • मरणोपरांत सर्वप्रथम लालबहादुर शास्त्री को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
  • 13 जुलाई, 1977 से 26 जनवरी, 1980 तक इस पुरस्कार को स्थगित कर दिया गया था।
  • एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है, यह भी अनिवार्य नहीं है कि भारतरत्न सम्मान हर वर्ष दिया जाए।
  • उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले सम्मानों में भारत रत्न के पश्चात् क्रमशः पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री हैं।
  • भारत-रत्न  कीअनुशंसा प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को भेजी जाती हैं।
  • भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री आदि किसी भी पुरस्कार में कोई धन-राशि नहीं दी जाती हैं। पुरस्कार में व्यक्ति पदक के साथ, प्राप्तकर्ता और राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (प्रमाण पत्र) प्राप्त करता है।
  • भारत-रत्न प्राप्त करने वाला व्यक्ति/नागरिक का अलंकरण पूर्व प्रधानमंत्रियों, संघ की कैबिनेट मंत्रियों, राज्य सभा और लोक सभा, भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष और राज्यों के संबंधित मुख्यमंत्रियों में मुख्य विपक्षी नेता के साथ संयुक्त रूप से सातवें स्थान में आता है
  • अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है जिसमें दो विदेशी नागरिक (ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान और नेल्सन मंडेला) भी शामिल हैं।

“भारत-रत्न” पदकस्वरूप (Specifications)

मूल रूप में इस सम्मान के पदक का डिजाइन 35 मिलिमीटर व्यास वाला गोलाकार स्वीर्ण पदक था। जिसमें सामने  सूर्य बना था, ऊपर हिन्दी में भारत रत्न लिखा था और नीचे फूलों का गुलदस्ता था और पीछे की तरफ़ राष्ट्रीय चिह्न और आदर्श-वाक्य(सत्यमेव जयते) लिखा था। एक वर्ष बाद इस डिजाइन को बदल दिया गया था और आज भी इसके इसी स्वरुप(design) को काम में लिया जाता हैं, इस पदक के डिज़ाइन को बदल कर तांबे के बने पीपल के पत्ते (जोकि लगभग 59 mm लम्बा , 48 mm चौड़ा और 3.2 mm पतला) पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बना दिया गया, और पीछे का हिस्सा पहले जैसा ही रखा गया। जिसके नीचे चाँदी में लिखा रहता है “भारत रत्न” और यह सफ़ेद फीते (2-इंच-चौडाई लगभग 51 mm) के साथ गले में पहना जाता है।
Bharat Ratna

Bharat Ratna

भारत रत्न के साथ  जुड़े अन्य परिलब्धियां एवम भत्ते

  1. Free first class flight journey anywhere in India.
    भारत में कहीं भी प्रथम-श्रेणी की  मुफ्त हवाई-उड़ान(यात्रा)
  2. Free first class train journey.
    नि: प्रथम श्रेणी की ट्रेन यात्रा।
  3. Pension equal to or 50% of Prime Minister of India’s salary.
    भारत के प्रधानमंत्री वेतन के बराबर या 50% की पेंशन।
  4. Can attend the Parliament meetings and sessions.
    संसद की बैठकों और सत्र में भाग लेने की अनुमति।
  5. Precedence at par with Cabinet Rank.
    कैबिनेट रैंक के बराबर पूर्वता (योग्यता)।
  6. Eligible for Z-category protection, if needed.
    जेड श्रेणी की सुरक्षा के लिए पात्र है, अगर जरूरत  हो तो।
  7. Special Guest in Republic Day and Independence Day.
    गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में विशेष अतिथि।
  8. Status equal to VVIP.
    वीवीआईपी के बराबरी का दर्जा।

Bharat Ratna Award List 2019

  1. वर्ष 1954 : चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (1878–1972)
  2. वर्ष 1954 : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1888–1975)
  3. वर्ष 1954 : डॉ. चन्द्रशेखर वेंकटरमन (1888–1970)
  4. वर्ष 1955 : डॉ. भगवान दास (1869–1958)
  5. वर्ष 1955 : डॉ. मोक्षागुंडम विश्वेश्वरैया (1861–1962)
  6. वर्ष 1955 : जवाहरलाल नेहरू (1889–1964)
  7. वर्ष 1957 : गोविन्द बल्लभ पंत (1887–1961)
  8. वर्ष 1958 : डॉ. धोडो केशव कर्वे (1858–1962)
  9. वर्ष 1961 : डॉ​ बिधाचन्द्र राय (1882–1962)
  10. वर्ष 1961 : पुरुषोत्तमदास टण्डन (1882–1962)
  11. वर्ष 1962 : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (1884–1963)
  12. वर्ष 1963 : डॉ. जाकिर हुसैन (1897–1969)
  13. वर्ष 1963 : डॉ. पांडुरंग वामन काणे (1880–1972)
  14. वर्ष 1966 : लालबहादुर शास्त्री (मरणोपरांत) (1904–1966)
  15. वर्ष 1971 : इन्दिरा गांधी (1917–1984)
  16. वर्ष 1975 : वराहगिरि वेंकटगिरि (1894–1980)
  17. वर्ष 1976 : कुमारास्वामी कामराज (मरणोपरांत) (1903–1975)
  18. वर्ष 1980 : मेरी टेरेसा बोजाक्सिऊ (मदर टेरेसा) (1910–1997)
  19. वर्ष 1983 : आचार्य विनोबा भावे (मरणोपरांत) (1895–1982)
  20. वर्ष 1987 : खान अब्दुल गफ्फार खाँ (1890–1988)
  21. वर्ष 1988 : मरुदु गोपालन रामचन्द्रन (मरणोपरांत) (1917–1987)
  22. वर्ष 1990 : डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर (मरणोपरांत) (1891–1956)
  23. वर्ष 1990 : डॉ. नेल्सन रोहिल्हाल्हा मंडेला (1918–2013)
  24. वर्ष 1991 : राजीव गांधी (मरणोपरांत) (1944–1991)
  25. वर्ष 1991 : सरदार वल्लभभाई पटेल (मरणोपरांत) (1875–1950)
  26. वर्ष 1991 : मोरारजी रणछोड़जी देसाई (1896–1995)
  27. वर्ष 1992 : मौलाना अबुल कलाम आजाद (मरणोपरांत) (1888–1958)
  28. वर्ष 1992 : जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा (1904–1993)
  29. वर्ष 1992 : सत्यजीत रे (1922–1992)
  30. वर्ष 1997 : अरुणा आसफ अली (मरणोपरांत) (1909–1996)
  31. वर्ष 1997 : गुलजारीलाल नंदा (मरणोपरांत) (1898–1998)
  32. वर्ष 1997 : डॉ. अवुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम (जन्म 1931)
  33. वर्ष 1998 : मदुराई षण्मुखावैदीवु सुब्बालक्ष्मी (1916–2004)
  34. वर्ष 1998 : चिदम्बरम सुब्रमण्यम (1910–2000)
  35. वर्ष 1999 : लोकनायक जयप्रकाश नारायण (मरणोपरांत) (1902–1979)
  36. वर्ष 1999 : प्रोफेसर अमर्त्य सेन (जन्म 1933)
  37. वर्ष 1999 : लोकप्रिय गोपीनाथ बादोलोई (मरणोपरांत) (1890–1950)
  38. वर्ष 1999 : पंडित रविशंकर (1920–2012)
  39. वर्ष 2001 : लता मंगेशकर (जन्म 1929)
  40. वर्ष 2001 : उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ (1916–2006)
  41. वर्ष 2008 : प. भीमसेन जोशी (1922–2011)
  42. वर्ष 2013 : सचिन तेंदुलकर (जन्म 1973)
  43. वर्ष 2013 : प्रो. सीएनआर राव (जन्म 1934)
  44. वर्ष 2014 : अटलबिहारी वाजपेयी (जन्म 1924)
  45. वर्ष 2014 : महामना मदन मोहन मालवीय (1861–1946)
  46. वर्ष 2019 : प्रणव मुखर्जी
  47. वर्ष 2019 : भूपेन हजारिका
  48. वर्ष 2019 : नानाजी देशमुख