Teachers Day 2019 : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म :

डॉ॰ राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडुके तिरूतनी ग्राम में, जो तत्कालीन मद्रास से लगभग 64 कि॰ मी॰ की दूरी पर स्थित है, 5 सितम्बर 1888 को हुआ था | उनका जन्म स्थान भी एक पवित्र तीर्थस्थल के रूप में विख्यात रहा है |

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन परिवार : 

जिस परिवार में उन्होंने जन्म लिया वह एक ब्राह्मण परिवार था |  राधाकृष्णन के पुरखे पहले कभी ‘सर्वपल्ली’ नामक ग्राम में रहते थे और 18वीं शताब्दी के मध्य में उन्होंने तिरूतनी ग्राम की ओर निष्क्रमण किया था। लेकिन उनके पुरखे चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्मस्थल के ग्राम का बोध भी सदैव रहना चाहिये। इसी कारण उनके परिजन अपने नाम के पूर्व ‘सर्वपल्ली’ धारण करने लगे थे।

उनके पिता का नाम ‘सर्वपल्ली वीरास्वामी’ और माता का नाम ‘सीताम्मा’ था

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन विद्यार्थी जीवन : 

राधाकृष्णन का बाल्यकाल तिरूतनी एवं तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों पर ही व्यतीत हुआ | उन्होंने प्रथम आठ वर्ष तिरूतनी में ही गुजारे | 1896-1900 के मध्य विद्याध्ययन के लिये क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल, तिरूपति में भेजा गया |फिर अगले 4 वर्ष (1900 से 1904) की उनकी शिक्षा वेल्लूर में हुई। इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास में शिक्षा प्राप्त की | उन्होंने 1902 में मैट्रिक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की | 1904 में कला संकाय परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की | 1908 में ही उन्होंने कला स्नातक की उपाधि प्रथम श्रेणी में प्राप्त की | 1909 में उन्होंने कला में स्नातकोत्तर परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली   |

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन उपाधियाँ : 

  • सन् 1931 से 36 तक आन्ध्र विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे।
  • ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक रहे।
  • कलकत्ता विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में 1937 से 1941 तक कार्य किया।
  • सन् 1939 से 48 तक काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालय के चांसलर रहे।
  • 1953 से 1962 तक दिल्ली विश्‍वविद्यालय के चांसलर रहे।
  • 1946 में युनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति कैसे बने ?

सर्वपल्ली राधाकृष्णन की यह प्रतिभा थी कि स्वतन्त्रता के बाद इन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। वे 1947 से 1949 तक इसके सदस्य रहे | अखिल भारतीय कांग्रेसजन यह चाहते थे कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन गैर राजनीतिक व्यक्ति होते हुए भी संविधान सभा के सदस्य बनाये जायें | 1952 में सोवियत संघ से आने के बाद डॉक्टर राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति निर्वाचित किये गये। संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का नया पद सृजित किया गया था। नेहरू जी ने इस पद हेतु राधाकृष्णन का चयन करके पुनः लोगों को चौंका दिया। उन्हें आश्चर्य था | उपराष्ट्रपति के रूप में राधाकृष्णन ने राज्यसभा में अध्यक्ष का पदभार भी सम्भाला। सन 1952 में वे भारत के उपराष्ट्रपति बनाये गये |

हम 5 सितंबर को शिक्षक दिवस क्यों मनाते हैं ?

5 सितंबर को एक महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है, जो शिक्षा के कट्टर विश्वासी थे और एक प्रसिद्ध राजनयिक, विद्वान, भारत के राष्ट्रपति और सबसे ऊपर, एक शिक्षक थे।

जब उनके कुछ छात्रों और दोस्तों ने उनसे संपर्क किया और उनसे उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति देने का अनुरोध किया, तो उन्होंने कहा, “मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय, यह मेरा गौरवपूर्ण विशेषाधिकार होगा, यदि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है”। तब से, 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

1965 में, स्वर्गीय डॉ. एस. राधाकृष्णन के कुछ प्रमुख छात्रों ने उस महान शिक्षक के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक सभा का आयोजन किया। उस सभा में डॉ. राधाकृष्णन ने अपने भाषण में कहा कि उनकी जयंती को भारत और बांग्लादेश के अन्य महान शिक्षकों को श्रद्धांजलि देकर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। वर्ष 5 सितंबर 1967 से लेकर आज तक शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।