जैन धर्म से सम्बंधित कुछ ज़रुरी जानकारी

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जैन धर्म के संस्थापक, वर्धमान महावीर का जन्म बिहार में स्थित वशाली में हुआ था |
उनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ था और माता का नाम रानी त्रिशला था |
जैन धर्म के अनुसार तीर्थंकर ऐसे मानव हैं जिन्होने अनंत जन्म और मृत्यु के चक्र को समाप्त करने मे सफलता पा ली है और जो दूसरों के लिए एक मार्गदर्शक बन गए है । जैन धर्म मे 24 तीर्थंकर हुए है ।
ऋषभदेव जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे जिन्हे जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है ।
पार्श्वनाथ 23 वें तिर्थंकर थे, और महावीर 24वें तीर्थंकर थे ।
जैन शब्द बना है ‘जिन’ शब्द से जिसका अर्थ है जीतने वाला अर्तार्थ जिसने अपना मन जीत लिया हो ।
महावीर ने अपना पहला धर्मोपदेश राजगृह स्थित विपुल पर्वत पर दिया था ।
चंद्रगुप्त मौर्य अपनी मृत्यु से पहले जैन धर्म के अनुयायी बन गये थे ।
श्वेतम्बर और दिगम्बर जैन धर्म के दो मुख्य संप्रदाय हैं । श्वेतम्बर संप्रदाय के अनुयायी (श्वेत यानि सफेद और अम्बर यानि कपड़े) सफेद कपड़े पहनते हैं, दिगम्बर संप्रदाय के अनुयायी वस्त्र धारण नहीं करते (दिग यानि आकाश और अम्बर यानि कपड़े)

 

बुद्ध और महावीर – एक तुलना

बुद्ध महावीर
जन्म स्थान लुम्बिनी वैशाली
जन्म का वर्ष 567 ईसा पूर्व 599 ईसा पूर्व
वास्तविक नाम सिद्धार्थ वर्धमान
उपदेश ग्रंथ त्रिपिताकाएँ महावीर के 14 पूर्व
पिता का नाम सुद्धोदन सिद्धार्थ
पत्नी का नाम यशोधरा यशोदा
निर्वाण का स्थान कुशीनगर, गोरखपुर राजगीर, बिहार

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